
एक सचिव, दो पंचायतों में सवाल! ग्राम सभा की फोटो से लेकर सीसी सड़क भुगतान तक जांच की मांग
जीशान अंसारी की रिपोर्ट

कोटा/खोंगसरा कोटा जनपद पंचायत क्षेत्र की दो ग्राम पंचायतों में पंचायत सचिव की कार्यप्रणाली को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। पंचायत पोर्टल पर ग्राम सभा की कथित एक जैसी फोटो अपलोड होने और एक अन्य पंचायत में सीसी सड़क निर्माण का भुगतान होने के बावजूद सड़क नहीं बनने के आरोपों ने पूरे मामले को चर्चा में ला दिया है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की है।
ग्रामीणों के अनुसार, भारत सरकार के पंचायत पोर्टल का उद्देश्य पंचायतों में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है, ताकि ग्राम सभा, विकास कार्यों और योजनाओं से संबंधित जानकारी आम नागरिक आसानी से देख सकें। पोर्टल का अवलोकन करने पर ग्रामीणों ने दावा किया कि ग्राम पंचायत आमागोहन और खोंगसरा की अलग-अलग ग्राम सभाओं के रिकॉर्ड में 13 सितंबर 2025 की एक ही तस्वीर अपलोड की गई है। उनका कहना है कि यदि ग्राम सभाएं अलग-अलग आयोजित हुई थीं, तो उनकी वास्तविक तस्वीरें, उपस्थिति पंजी, कोरम और कार्यवाही विवरण भी अलग-अलग होना चाहिए था।

इधर, ग्राम पंचायत तुलुफ के आश्रित ग्राम साजादहरा में सीसी सड़क निर्माण को लेकर भी शिकायत सामने आई है। शिकायतकर्ता अमित पाटनवार का आरोप है कि लगभग एक वर्ष पहले स्वीकृत सड़क का निर्माण आज तक नहीं हुआ, जबकि भुगतान निकालकर कागजों में कार्य पूर्ण दर्शा दिया गया। उन्होंने बताया कि इस मामले की शिकायत सुशासन दिवस के दौरान भी की गई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत सचिव रमाकांत श्याम वर्तमान में तुलुफ और खोंगसरा ग्राम पंचायतों का प्रभार संभाल रहे हैं। उनका आरोप है कि एक ही सचिव के पास दो पंचायतों का प्रभार होने से पंचायत कार्यों की निगरानी, रिकॉर्ड संधारण और विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं तथा सचिव की नियमित उपलब्धता नहीं रहने से ग्रामीणों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

ग्रामीणों ने कलेक्टर, जिला पंचायत सीईओ और जनपद पंचायत अधिकारियों से मांग की है कि पंचायत पोर्टल पर अपलोड ग्राम सभा के रिकॉर्ड, सीसी सड़क निर्माण की स्वीकृति, माप पुस्तिका (एमबी), भुगतान संबंधी अभिलेख तथा कार्यस्थल का भौतिक सत्यापन कर निष्पक्ष जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि यदि जांच में अनियमितता सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।


















